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संयुक्त परिवार की विलुप्त होती संस्कृति

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  08-Jan-2024 | विमल कुमार



युवाल नोआ हरारी सच कहते हैं, “इतिहास हमें कोई छूट नहीं देता है। अगर मनुष्यता के भविष्य का फैसला आपकी गैर मौजूदगी में होता है क्योंकि आप अपने बच्चों का पेट भरने और तन ढकने के काम में बेहद व्यस्त हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप और वह इसके नतीजे से बचे रहेंगे।”

21वीं सदी जहां विकास और समृद्धि की सदी के रूप में पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है वहीं यह सदी अनगिनत संस्कृतियों और संरचनाओं की विलुप्ति का गवाह भी बनती जा रही है। आज 21वीं सदी के मानव को असंख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्याएं सिर्फ प्राकृतिक ही नहीं बल्कि मानवजनित भी हैं।

बहुत सारी समस्याएं हमारी सामाजिक संरचनाओं में परिवर्तन के कारण भी जन्म लेती हैं। प्राचीन सामाजिक संरचनाओं के टूटने की वजह से भी नई समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी ही एक सामाजिक संरचना है- परिवार। प्रत्येक व्यक्ति का समाज में एक स्थान या स्थिति होती है। सामाजिक संस्थाओं में हमारी अनगिनत भूमिकाएं होती हैं। सामाजिक संस्थाएं राज्य की तरह वृहद या परिवार की तरह लघु हो सकती हैं। ये संस्थाएं व्यक्तियों पर प्रतिबंध भी लगाती हैं एवं अवसर भी प्रदान करती हैं। परिवार समाज की मूल या प्राथमिक इकाई है। परिवार जैसी नैसर्गिक अन्य सामाजिक संस्था नहीं है।

विभिन्न विद्वानों ने परिवार की विविध संकल्पनाएं की हैं। परिवारों की संरचना के आधार पर हम इसे एकल एवं संयुक्त परिवार के रूप में वर्गीकृत करते हैं।

एकल परिवार में माता-पिता एवं भाई-बहन शामिल होते हैं वहीं संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ निवास करते हैं। जो परिवार पिता की पहचान से होते हैं उन्हें पितृवंशी एवं जिनकी पहचान माता से होती है उन्हें मातृवंशी कहा जाता है। परिवार की एक महत्वपूर्ण पहचान यह भी है कि उपनाम सभी सदस्यों का एक होता है।

संयुक्त परिवार को भी विभिन्न विद्वानों ने अलग मापदंडों के आधार पर परिभाषित किया है। जहां इरावती कर्वे संयुक्तता में ‛सहनिवासिता’ को महत्वपूर्ण मानती हैं वहीं हैरोल्ड गूल्ड, रामकृष्ण मुखर्जी एवं एस.सी. दुबे सहनिवासिता और सहभोज को संयुक्तता के आवश्यक तत्व नहीं मानते। वहीं पर एक अन्य विद्वान आई.पी. देसाई संयुक्त परिवार को परिभाषित करने में दायित्वों की पूर्ति को महत्व देते हैं।

सामान्य अर्थों में देखा जाए तो संयुक्त परिवार, “व्यक्तियों का एक ऐसा समूह जो विवाह के बंधन, खून के रिश्ते या गोंद लिए जाने से बंधकर एक परिवार का निर्माण करते हैं, जो पति और पत्नी, माता और पिता, पुत्र और पुत्री, भाई और बहन की अपनी-अपनी सामाजिक भूमिकाओं में एक दूसरे के साथ परस्पर व्यवहार करते हैं और एक समान संस्कृति का सृजन करते हैं।”

अतः संयुक्त परिवार से आशय ऐसे परिवार से है जिसमें एक से अधिक युगल दंपति होते हैं और अक्सर दो से अधिक पीढ़ियों के लोग एक साथ रहते हैं।

आज संयुक्त परिवार दरकते जा रहे हैं। हमारे सामने यह यक्ष प्रश्न है कि विकास और भौतिकता की अंधी दौड़ में कहीं ना कहीं हम अपनी संस्कृति में विद्यमान उन संस्थाओं से वंचित होते जा रहे हैं जो हमारे व्यक्तित्व को नया आयाम देती हैं। संयुक्त परिवार की विलुप्त होती संस्कृति भी एक ऐसा पक्ष है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है। भारतीय समाज और संस्कृति की दुनिया भर में एक अनूठी पहचान है। धर्म, दर्शन, ज्ञान एवं जीवन शैली का एक विशिष्ट एवं समावेशी भारतीय मॉडल दुनियां भर के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। संयुक्त परिवार की संस्कृति भी भारतीय समाज की एक महत्वपूर्ण पहचान है जो कि आज विलुप्ति की दिशा में अग्रसर है।

महत्त्व-

भारतीय समाज व्यवस्था के सफल संचालन में संयुक्त परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संयुक्त परिवार दुनियां भर में भारतीय संस्कृति एवं समाज का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से हम संयुक्त परिवार के महत्व की पहचान कर सकते हैं-

  • संयुक्त परिवार समाजीकरण का एक ऐसा यंत्र है जहां पर स्नेहपूर्ण वातावरण में कम संसाधनों के साथ नियंत्रण की भावना का विकास होता है।
  • संयुक्त परिवार के माध्यम से बच्चों का संपूर्ण पालन पोषण होता है एवं काम का बोझ किसी एक सदस्य पर बहुत ज्यादा नहीं होता है।
  • संयुक्त परिवार आवश्यकताओं, इच्छाओं और सरोकारों को एक दूसरे के साथ बांटने और सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता के योग्य बनाता है।
  • संयुक्त परिवार, संयुक्त उत्तरदायित्व के आदर्श के आधार पर कार्य करता है।
  • संयुक्त परिवार के माध्यम से सामाजिक भावनात्मक अनुभव का विकास होता है। इसके माध्यम से टीम भावना विकसित होती है जो कि साहचर्य एवं समावेशन की संस्कृति को बढ़ावा देती है।
  • संयुक्त परिवार एक बेहतर नागरिक के निर्माण में सकारात्मक सहयोग करता है।
  • संयुक्त परिवार में संप्रेषण एवं अभिव्यक्ति के ज्यादा अवसर प्राप्त होते हैं।
  • संयुक्त परिवार मनोवैज्ञानिक एवं आर्थिक सहयोग की एक संस्था की तरह कार्य करता है जिसमें सेवा भाव की संस्कृति विद्यमान रहती है।
  • संयुक्त परिवार के माध्यम से ही समाज की संस्कृति का संरक्षण एवं बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है।
  • संयुक्त परिवार एकता के सूत्र में बंधे रहने की कला का वाहक भी है।

इस प्रकार से संयुक्त परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है जहां पर सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास के अवसर भी प्राप्त होते हैं।

विलुप्ति का कारण-

संयुक्त परिवार की विलुप्ति का एक प्रमुख कारण आर्थिक है। आर्थिक प्रक्रियाओं के कारण परिवार और नातेदारी संबंध रूपांतरित होते हैं। औद्योगिकीरण ने सामाजिक वर्ग में बदलाव किया। औद्योगिकरण, मशीनीकरण और शहरीकरण ने मध्यमवर्ग को जन्म दिया। यह मध्य वर्ग संयुक्त परिवार की संस्कृति के अनुसार जीवन शैली नहीं जी सकता है। व्यक्तिवाद एवं पूंजीवाद संयुक्त परिवार की संरचना को काफी हद तक प्रभावित किया। व्यक्तिवादी दृष्टिकोण ने संयुक्त परिवार को बंधन के रूप में देखा एवं पूंजीवाद ने भावनात्मक संबंधों के बजाय आर्थिक पक्ष को ज्यादा महत्व दिया। भूमंडलीकरण भी संयुक्त परिवार की विलुप्त होती संस्कृति का

एक प्रमुख कारण है। लोग अपनी अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए परिवार से दूर दूसरे राज्यों या देश की तरफ पलायन करने लगे और फिर वहीं बस गए।

संयुक्त परिवार के विलुप्त होने का एक प्रमुख कारण स्वतंत्रता एवं समानता का दृष्टिकोण भी है। संयुक्त परिवार की संरचना सत्तावादी होती है निर्णय शीर्ष द्वारा अर्थात मुखिया द्वारा लिया जाता है। अतः संयुक्त परिवार में रहते हुए कुछ सीमाओं का अनुपालन करना होता है जिससे परिवार के सदस्यों को लगता है की उन्हें उतनी स्वतंत्रता नहीं मिल रही है। अवसर की समानता भी एक प्रमुख बिंदु है जो संयुक्त परिवार की टूटन की वजह बन रहा है। सामाजिक रीति-रिवाज एवं धार्मिक विश्वास भी संयुक्त परिवार की टूटन की एक प्रमुख वजह बन रहे हैं।

यदि लैंगिक दृष्टिकोण से देखें तो स्त्री-पुरुष बराबरी के प्रश्न पर संयुक्त परिवार की स्थिति संतोषजनक नहीं होती है। जो भी समाज पितृसत्तात्मक हैं वहां पर संयुक्त परिवार में महिलाओं को और भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। एकल परिवार में निजता का ज्यादा अवसर मिलता है। इसलिए लोगों का संयुक्त परिवार से मोहभंग होता दिखता है। आत्मनिर्भरता ने भी संयुक्त परिवार की संरचना को प्रभावित किया है जैसे-जैसे लोग आत्मनिर्भर होते जाते हैं वैसे ही अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में किसी का हस्तक्षेप स्वीकार करना उन्हें बंधन जैसे लगता है। लोगों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं संयुक्त परिवार के दरकने का एक प्रमुख आधार बनती दिखाई देती हैं।

प्रासंगिकता-

21वीं सदी के संक्रमण के दौर में संयुक्त परिवार की संरचना बहुत प्रासंगिक नजर आती है। एकल परिवार ने एकाकीपन और अवसाद की समस्या को जन्म दिया है।

संयुक्त परिवार न सिर्फ भावनात्मक संबल प्रदान करते हैं बल्कि सुख और दुःख के क्षणों में सहभागी बन मानवीय मूल्यों को विस्तार देते हैं। संयुक्त परिवार बचपन से ही सर्वांगीण व्यक्तित्व के विकास और वृद्धावस्था में सहारे का आधार बनते हैं। आज के समाज में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है इसकी एक प्रमुख वजह संयुक्त परिवार की टूटन है।

आज संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और एक आभासी दुनिया का निर्माण हो रहा है लेकिन ऑनलाइन रिश्तों की सीमाएं हैं। वास्तविक समुदायों में जो गहराई होती है उसका मुकाबला आभासी समुदाय नहीं कर सकते। लोगों की रुचियों पर कब्जा करके और फिर उनको विज्ञापन कर्ताओं को बेचकर हम वैश्विक समुदाय की स्थापना नहीं कर सकते।

संयुक्त परिवार की विलुप्त होती संस्कृति समाज के लिए बेहद गंभीर समस्या है क्योंकि संयुक्त परिवार समावेशन और सहिष्णुता के वाहक हैं जिनके माध्यम से एक खुशहाल एवं समृद्धि विश्व का निर्माण किया जा सकता है।

आधुनिकता एवं विकास की विभिन्न अवधारणाएं अपनी विश्वसनीयता ठीक उस वक्त खो रही हैं जब सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी की जुड़वा क्रांतियां हमारे सामने वे सबसे बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं जिस तरह की चुनौतियों का सामना हमारी प्रजाति ने कभी नहीं किया था।

हमें अपने समक्ष मौजूद नई चुनौतियों का परीक्षण करते हुए आधुनिक भौतिक विकास की सीमाओं को समझना होगा और इस बात का पता लगाना होगा कि मौजूदा संस्थाओं को किस तरह अपनी जरूरत के अनुरूप बदल सकते हैं और उनमें सुधार ला सकते हैं। और हां आज संयुक्त परिवार का आकार भले छोटा हुआ है

लेकिन यह विलुप्त नहीं हुआ है। भारतीय संस्कृति में मौजूद तत्व हमें आशान्वित करते हैं कि संयुक्त परिवार पूर्ण रूप से कभी भी एकाकी परिवार में नहीं बदल सकता है बस समय रहते हमें इस विशिष्ट सामाजिक संरचना को सहेज लेना होगा।



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