बढ़ते शहरीकरण के बीच गाँवों का अस्तित्व
« »30-May-2023 | संकर्षण शुक्ला
प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता नेल्स एंडरसन के अनुसार, लोगों का ग्रामीण इलाकों से नगरीय निवास की ओर स्थानांतरण ही शहरीकरण कहलाता है। यदि इसे और सरल शब्दों में कहा जाए तो नगरीयता से तात्पर्य नगरीय जीवनशैली से है। नगरीय जीवनशैली से आशय एक विशेष क्षेत्र के अंतर्गत घनीभूत जनसंख्या से है जिसका मुख्य व्यवसाय कृषि से इतर होता है। इसके साथ ही वैयक्तिकता, द्वितीयक समूह, सामाजिक गतिशीलता , जनसंख्या का पृथक्करण अथवा विशेषीकरण, श्रम विभाजन, सामाजिक एकता का अभाव, पारस्परिक संघर्ष का अभाव, सामाजिक नियंत्रण के द्वितीयक साधन, औपचारिक संबंध, अंधविश्वासों का अभाव, स्त्रियों को स्वतंत्रता, सामाजिक सामंजस्य आदि विशेषताएं भी शहरीकरण के प्रमुख अवयव हैं।
आमतौर पर विकास और शहरीकरण को एक ही सिक्के का दो पहलू माना जाता है। यहाँ पर मानव की समस्त गतिविधियों को एकत्रित किया जाता है और इससे अमुक कार्य में विशेषज्ञता आती है जो अंततः उत्पादकता को बढ़ाती है। उत्पादकता बढ़ने से माल की उपलब्धता बढ़ती है और सेवा की डिलीवरी में गुणवत्ता आती है। इसके साथ ही श्रमिकों की मजदूरी में इजाफा होता है और रोजगार के विभिन्न अवसर सृजित होते है। कुल मिलाकर शहरों को वृद्धि का इंजन माना जाता है।
यदि भारत मे नगरीकरण के ऐतिहासिक पहलुओं को तलाशें तो यहाँ पर सिंधु घाटी सभ्यता के दौर से ही शहरीकरण के प्रमाण मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता एक नियोजित सभ्यता है जहाँ पर सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं और नालियाँ ढकी हुई हैं जो मेनहोल से जुड़ती हैं। इस तरह ये जल निकासी की उचित व्यवस्था भी उपलब्ध कराती हैं। शहरीकरण का इतिहास मानव सभ्यता के क्रमिक विकास का इतिहास है। इसके विभिन्न कारक है। यदि आर्थिक कारकों पर चर्चा करें तो शहरीकरण की क्रांति को तीन चरणों मे समझा जा सकता है- कृषि, औद्योगिक, परिवहन। इन तीन क्रांतियों ने वर्तमान शहरीकरण के स्वरूप को मुहूर्त रूप प्रदान किया। इसके साथ ही खनिजों की प्राप्ति, व्यापार एवं वाणिज्य और आजीविका के अवसर समग्र रूप से शहरीकरण को एक सार्थक आकार प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त शहरीकरण के लिए विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक और जनसांख्यिकी कारक भी जिम्मेदार हैं।भारतीय संविधान में शहरों का विकास राज्य सूची का विषय है।
राज्यपाल किसी शहर को तीन आधारों पर शहर के रूप में अधिसूचित करता है- जनसंख्या घनत्व, स्थानीय प्रशासन, राजस्व एवं गैर कृषि गतिविधियों में नियोजन। इसके साथ ही यहाँ पर स्थानीय सरकार हो और यहाँ की जनसंख्या 50 हजार हो और साथ ही में गैर कृषि गतिविधियों में यहाँ की 75 फीसदी पुरुष आबादी नियोजित हो तथा 400 प्रति वर्ग किमी का जनसंख्या घनत्व हो। आधुनिक भारत मे यदि शहरीकरण के विकास पर चर्चा की जाए तो यहाँ पर वर्ष 1991 के उदारीकरण के बाद से शहरीकरण में तेजी आई। अर्थव्यवस्था के निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण के बाद से यहाँ पर निजी क्षेत्रों ने उत्पादन गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया और परिणामतः भारत मे अनेक नवीन शहरों का सृजन हुआ।
वर्ष 1901 में भारत की 10.84 फीसदी आबादी शहरों में निवास करती थी तो 1990 में ये आँकड़ा 25 फ़ीसदी तक पहुँच गया। यदि वर्ष 2011 के जनसंख्या एवं नगरीकरण के आंकड़ो की बात की जाए तो यहाँ की 31.16 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। हालांकि हालिया आंकड़े बताते है कि अभी भारत की 34 फीसदी आबादी शहरीकृत है साथ ही शहरीकरण की वृद्धि दर 3 फीसदी है। ये आँकड़ें विभिन्न राज्यों के हालिया प्रति व्यक्ति राज्य सकल घरेलू उत्पाद, शिक्षा सकल नामांकन दर और सम्पूर्ण प्रजनन दर पर आधारित हैं। इसके अनुसार भारत के दक्षिण पश्चिम जोन मे उत्तरी भारत की अपेक्षा अधिक शहरीकरण है। इन राज्यों का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू राज्य उत्पाद उच्च होने के साथ ही यहाँ पर शिक्षा सकल नामांकन दर भी उच्च है। इसके साथ ही यहाँ की समग्र प्रजनन दर भी राष्ट्रीय औसत से नीचे है। उत्तर-केंद्रीय-पूर्वी जोन के राज्यों में शहरीकरण सबसे निम्न है। सबसे कम शहरीकरण बिहार में है। यहाँ की महज 11 फीसदी आबादी शहरीकृत है। यहाँ पर निम्न रोजगार दर के साथ ही शिक्षा का भी स्तर अपेक्षाकृत निम्न है। यहाँ के ज्यादातर लोग अभी असंगठित क्षेत्रो में ही नियोजित है और कृषि आश्रित जनसंख्या का बाहुल्य है।
अत्यधिक वृद्धि वाले क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर सृजित होते हैं। यहाँ पर संवृद्धि दर भी बढ़ती है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय काम किया है जिसे विभिन्न सरकारी रिपोर्टों में भी देखा जा सकता है। शहरीकरण के मामले मे यदि अन्य देशों के साथ भारत की तुलना की जाए तो चीन ने इस संबंध में व्यापक प्रगति दर्ज की है। चीन में जहाँ वर्ष 1990 में महज 27 फीसदी शहरीकरण था वही आज 60 फीसदी शहरीकरण है। यही शहर उसकी वृद्धि के इंजन हैं जिन्होंने नॉमिनल जीडीपी के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था को 14 ट्रिलियन के पार पहुँचा दिया है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राज्य अमेरिका में 83 फीसदी शहरीकरण है जबकि यूरोप में 75 फीसदी शहरीकरण है।
हालांकि बढ़ता शहरीकरण गाँवों के अस्तित्व पर संकट ला रहा है। गाँव मे रोजगार के उचित अवसरों के अभाव में वहाँ से जमकर पलायन हो रहा है। आजीविका के उचित अवसरों की तलाश के लिए गाँवो से होने वाला यह प्रवसन सतत किस्म का नहीं है। यह पहले से विद्यमान शहरों पर जनसंख्या का अधिभार तो थोपता ही है। इसके साथ ही यह शहरों में अनियोजित मलिन बस्तियों को भी बढ़ावा देता है। चूंकि शहरों का आकार तो बढ़ नहीं रहा है और न ही उनके पास स्थानीय विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में धन है तो ऐसे में आंतरिक प्रवासी लोगों का समूह अपने खर्चे के अनुसार रहने के ठीहे का इंतज़ाम खुद करता है जहाँ पर न तो पीने के पानी की उचित व्यवस्था उपलब्ध होती है और न ही जल निकासी की उचित व्यवस्था उपलब्ध होती है। शौच निपटान के कुप्रबंधन के कारण जल जनित बीमारियों जैसे हैजा, पीलिया, मियादी बुखार, डायरिया और पेचिश आदि की भी अधिकता रहती है।
बढ़ता शहरीकरण गाँवो के हरित हृदय को चीरते हुए वहाँ पर कंक्रीट की इमारतें बना देता है। ये इमारतें न सिर्फ गाँव की आबोहवा को गंदा करती हैं बल्कि यहाँ से निकलने वाले प्रदूषणकारी कणिकाओं की वजह से कोसों दूर तक प्रदूषण ही फैल जाता है। कंक्रीट सड़कों के निर्माण से भूजल पुनर्चक्रण की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे भारत के कृषि उद्योग को भी इससे झटका लगता है। भारत की अधिकांश कृषि नलकूप आधारित है। ऐसे में भूजल का स्तर जितना नीचे गिरेगा, कृषि को उतना ही नुकसान होगा। सामाजिक सहकार, संयुक्त परिवार गाँवो की संरचना का अनिवार्य तानाबाना है। आजीविका के लिए घर से बाहर आया हुआ सदस्य बमुश्किल त्यौहारों या महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजनों में ही अपने गाँव जा पाता है, ऐसे में उसके परिवार से दूरी न सिर्फ उसे तनाव देती है बल्कि पारिवारिक समस्याओं में भी इजाफा करती है।
पहले से ही गरीबी का सामना कर रहे गाँवो में तनाव, एकाकीपन, भावशून्यता, संवादहीनता, व्यक्तिवादिता आदि की समस्या आ जाती है। इसके साथ ही लगातार बढ़ता शहरीकरण गाँवो को सड़कों के माध्यम से जोड़ रहा है। इस कारण यहाँ पर बेतरतीब यातायात की समस्या उत्पन्न हो रही है जिसके कारण दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए सतत एवं समावेशी शहरीकरण की ओर कदम बढ़ाना होगा। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों की ओर बढ़ना होगा, साथ ही में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे, बुनियादी अवसंरचना का उचित विकास करना होगा; यह सभी कारक संयुक्त रूप से ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर प्रवसन को रोकेंगे।
इस दिशा में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन उल्लेखनीय है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत परियोजना आधारित बुनियादी अवसंरचना को वितरित करने हेतु ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें आर्थिक गतिविधियों का विकास और कौशल विकास भी शामिल है।‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन’ के कार्यान्वयन से पूर्व ‘प्रोविज़न ऑफ अर्बन अमेनिटीज़ टू रूरल एरियाज़’ को लागू किया गया था, जिसकी घोषणा वर्ष 2003 में की गई थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन का मुख्य उद्देश्य विशेष तौर पर आर्थिक, तकनीकी और सुविधाओं एवं सेवाओं के क्षेत्र में ग्रामीण-शहरी विभाजन को कम करना है।
![]() |
संकर्षण शुक्लासंकर्षण शुक्ला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से हैं। इन्होने स्नातक की पढ़ाई अपने गृह जनपद से ही की है। इसके बाद बीबीएयू लखनऊ से जनसंचार एवं पत्रकारिता में परास्नातक किया है। आजकल वे सिविल सर्विसेज की तैयारी करने के साथ ही विभिन्न वेबसाइटों के लिए ब्लॉग और पत्र-पत्रिकाओं में किताब की समीक्षा लिखते हैं। |
ब्लॉग कलेक्शन
दृष्टि Cuet
CUET की तैयारी
मोटीवेशन
कानून और समाज
व्यक्तित्त्व : जिन्हें हम पसंद करते हैं
विमर्श
हाल की पोस्ट
CUET (UG) 2025: परीक्षा तिथि, आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ
CUET UG 2025: पाएँ देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में एडमिशन
CUET (UG) परीक्षा में छात्रों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
बोर्ड परीक्षा की तैयारी में क्या न करें?
कक्षा 12वीं बोर्ड और CUET (UG) की तैयारी कैसे प्रबंधित करें?
CUET (UG) की तैयारी के लिए जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण 10 टॉपिक्स
CUET रसायन विज्ञान में हाई-वेटेज वाले टॉपिक्स -
मैं अपने आस-पास सर्वोत्तम CUET कोचिंग कैसे ढूंढ सकता हूँ?
CUET (UG) ऑनलाइन कोचिंग कितनी प्रभावी है?
ऑनलाइन कोचिंग से CUET की तैयारी कैसे करें?
लोकप्रिय पोस्ट
CUET (UG) 2025: परीक्षा तिथि, आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ
CUET UG 2025: पाएँ देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में एडमिशन
CUET (UG) परीक्षा में छात्रों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
बोर्ड परीक्षा की तैयारी में क्या न करें?
कक्षा 12वीं बोर्ड और CUET (UG) की तैयारी कैसे प्रबंधित करें?
CUET (UG) की तैयारी के लिए जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण 10 टॉपिक्स
CUET रसायन विज्ञान में हाई-वेटेज वाले टॉपिक्स -
मैं अपने आस-पास सर्वोत्तम CUET कोचिंग कैसे ढूंढ सकता हूँ?
CUET (UG) ऑनलाइन कोचिंग कितनी प्रभावी है?
ऑनलाइन कोचिंग से CUET की तैयारी कैसे करें?
